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प्रश्न: यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि एल्यूमीनियम प्लास्टिक पैनलों के कई बैचों के रंग पूरी तरह से सुसंगत हैं?
A: चौगुनी रंग नियंत्रण तकनीक को अपनाना: 1. डिजिटल सूत्र प्रणाली: ◦ पैनटोन रंग संख्या → सटीक कोटिंग अनुपात में परिवर्तित (त्रुटि ≤ 0.5%); 2. ऑनलाइन स्पेक्ट्रोफोटोमीटर: ◦ रोलर कोटिंग के दौरान हर 30 सेकंड में वर्णकता को स्कैन करता है (L*a*b* मानों के लिए ΔE ≤ 1.0); 3. समान भट्ठी उत्पादन सिद्धांत: ◦ एक ही परियोजना के पैनल एक ही भट्ठी में ठीक होते हैं (तापमान वक्र विचलन ±3°C); 4. नमूना तुलना: ◦ तीसरे पक्ष के परीक्षण के लिए डिलीवरी पर पहला टुकड़ा रंग नमूना प्रदान करता है (5 साल के लिए संग्रहीत)।
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प्रश्न: धातुई रंग या स्टेनलेस स्टील जैसा प्रभाव कैसे प्राप्त किया जा सकता है? क्या यह फीका पड़ जाएगा?
A: प्रौद्योगिकी के सिद्धांत: • एल्युमीनियम पाउडर अभिविन्यास व्यवस्था प्रौद्योगिकी: ◦ परत के आकार का एल्युमीनियम पाउडर (कण आकार 10-30μm) कोटिंग में डालें और विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र का उपयोग करके इसकी समानांतर व्यवस्था को नियंत्रित करें; • पारदर्शी सुरक्षात्मक परत: ◦ सतह को PVDF पारदर्शी फ्लोरोकार्बन परत (≥25μm) से ढकें, जिसकी परावर्तकता ≥85% हो। स्थायित्व आश्वासन: ✅ 20 वर्षों के भीतर रंग अंतर ΔE ≤ 3.0 (ASTM D2244 मानक) ❌ कम लागत वाले पॉलिएस्टर कोटिंग का निषेध — धातु पाउडर 2 वर्षों के बाद ऑक्सीकरण होकर काला हो जाता है!
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प्रश्न: गहरे रंग के पैनल (जैसे काले) उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में बुलबुले क्यों बनाते हैं? इसे कैसे रोका जा सकता है?
ए: तकनीकी प्रतिवाद: 1. कोर सामग्री अपग्रेड → क्रॉस-लिंक्ड पॉलीथीन (एक्सएलपीई) (120 डिग्री सेल्सियस का तापमान प्रतिरोध) पर स्विच करें 2. कोटिंग प्रक्रिया → एक माइक्रोपोरस सांस लेने योग्य परत जोड़ें (छिद्र आकार < 0.1μm, सांस लेने की क्षमता > 500 ग्राम/㎡/24 घंटे) 3. स्थापना डिज़ाइन → पैनल के पीछे 3 मिमी वेंटिलेशन गुहा आरक्षित करें (तापमान 15-20 डिग्री सेल्सियस कम करें)
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प्रश्न: कृत्रिम पत्थर या लकड़ी के दाने की त्रि-आयामी बनावट कैसे प्राप्त की जा सकती है? क्या यह घिसाव प्रतिरोधी है?
उत्तर: चरण 1: सब्सट्रेट प्रसंस्करण, प्रक्रिया: लेज़र एचिंग (गहराई 0.1 मिमी), प्रभाव अवधि: बनावट वाले पैटर्न का निर्माण। चरण 2: डिजिटल प्रिंटिंग, प्रक्रिया: यूवी इंकजेट (मौसम-प्रतिरोधी पिगमेंट), प्रभाव अवधि: 15 वर्षों तक रंग-स्थिर। चरण 3: एम्बॉसिंग क्योरिंग, प्रक्रिया: सिलिकॉन मोल्ड हॉट प्रेसिंग (160°C), प्रभाव अवधि: बनावट परिशुद्धता ±0.05 मिमी। चरण 4: सुरक्षात्मक परत, प्रक्रिया: नैनो-सिरेमिक कोटिंग, प्रभाव अवधि: मोहस कठोरता ≥6H।
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प्रश्न: पर्यावरण-अनुकूल कोटिंग्स का चुनाव कैसे करें? किन प्रमाणपत्रों पर ध्यान देना चाहिए?
A: प्रमुख संकेतक और प्रमाणन: • पर्यावरणीय कोर: ◦ शून्य क्रोमियम/शून्य सीसा सूत्र: हेक्सावलेंट क्रोमियम < 0.001%, सीसा < 50 पीपीएम (आईसीपी-एमएस द्वारा पता लगाया गया); • अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन: ◦ ✅ ग्रीनगार्ड गोल्ड (वीओसी उत्सर्जन ≤ 10 μg/m²) ◦ ✅ क्रैडल टू क्रैडल सिल्वर (सामग्री रीसाइक्लिंग दर ≥ 70%) ◦ ✅ EU EN 13501-1 अग्नि प्रतिरोध वर्ग B 'छद्म-फ्लोरोकार्बन' कोटिंग्स से सावधान रहें: वास्तविक PVDF रेज़िन सामग्री ≥ 70% (FTIR इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी रिपोर्ट आवश्यक) रंग प्रौद्योगिकी विस्तार: • विशेष प्रभाव प्रक्रियाएँ: ◦ ग्रेडिएंट रंग परिवर्तन: मैग्नेट्रॉन स्पटरिंग कोटिंग (फिल्म की मोटाई 0.3-0.8 μm, कोण रंग अंतर ΔE > 5.0); ◦ अंधेरे में चमकने वाली कोटिंग: दुर्लभ पृथ्वी एल्युमिनेट फॉस्फोरसेंट पाउडर (आफ्टरग्लो समय > 12 घंटे); • रखरखाव सुझाव: ◦ मजबूत क्षारीय सॉल्वैंट्स के साथ सफाई पर रोक लगाएं (पीएच > 10 कोटिंग को खराब कर देगा) → तटस्थ क्लीनर + नरम ब्रिसल ब्रश की सिफारिश करें।